एंटिफ्रैजीलिएंट OS: डेली नॉवशिफ्ट ट्रांसमिशन्स
हर सुबह, गहन ध्यान के बाद, Dr. Abhimanyou Raathore — एक अनुभवी क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, फंक्शनल मेडिसिन प्रैक्टिशनर, और Antifragilient OS के निर्माता — एक ऊर्जा-समृद्ध ट्रांसमिशन साझा करते हैं, जो आंतरिक और बाहरी रूपांतरण के लिए समर्पित है।
इन ट्रांसमिशन्स की जड़ें स्वयं अनुभव में हैं — बर्नआउट, बीमारी, और जीवन की गहराइयों से उभरकर पाए गए उत्तरों में।
हर एपिसोड एक वैज्ञानिक स्पष्टता और आध्यात्मिक समर्पण से भरा हुआ कोड है — जो न केवल मानसिक ऊर्जा को स्थानांतरित करता है, बल्कि आत्मा को भी स्पर्श करता है।
यह कोई प्रेरणादायक भाषण नहीं है।
यह एक आह्वान है — आत्मा की ओर लौटने का, छः शरीरों को पुनर्संरेखित करने का, और जीवन को अपने पूर्ण सामर्थ्य व शांति की लय में जीने का।
Antifragilient OS के ये दैनिक ट्रांसमिशन्स उन लोगों के लिए हैं जो थक चुके हैं, जागने की प्रक्रिया में हैं, या अपनी सर्वोच्च क्षमता में जीना चाहते हैं।
यह है NowShift — वह क्षण जहाँ सब कुछ बदलने लगता है।
🎧 रोज़ सुनें।
शब्दों को अपने भीतर उतरने दें।
मौन को आपको पुनः संपूर्ण करने दें।
एंटिफ्रैजीलिएंट OS: डेली नॉवशिफ्ट ट्रांसमिशन्स
जब असलियत धुंधली पड़ जाती है
एपिसोड 6/7 — ट्रॉमा सिम्प्टम्स मिनी सीरीज़
कभी ऐसा लगा है जैसे आप ज़िंदगी को किसी धुंधली खिड़की से देख रहे हों? या फिर समय जैसे अचानक गायब हो गया हो? ये कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आपके तंत्रिका तंत्र का संरक्षण तंत्र है।
एंटिफ्रैजीलिएंट OS: डेली नॉवशिफ्ट ट्रांसमिशन्स के इस एपिसोड में, डॉ. अभिमन्यु राठौर बताते हैं कि कैसे ट्रॉमा हमारे देखने, सुनने और महसूस करने के अनुभव को बदल देता है। वे चार प्रमुख संवेदी लक्षणों को सरल भाषा में समझाते हैं:
- हैलूसिनेशन — ऐसी चीज़ें देखना या सुनना जो असल में नहीं हैं।
- समय का गायब होना — घंटों या दिनों का बिना याद के निकल जाना।
- डिपरसनलाइज़ेशन — अपने ही शरीर से अलगाव महसूस होना।
- डिरेअलाइज़ेशन — आसपास की दुनिया का सपना जैसी लगना।
ये अनुभव जितने भ्रमित करने वाले लगते हैं, उतने ही महत्वपूर्ण भी हैं, क्योंकि ये इशारा करते हैं कि आपके अंदर कुछ ऐसा है जिसे प्यार, समय और उपचार की ज़रूरत है।
यह एपिसोड उन सभी के लिए है जो अपनी वास्तविकता में बदलाव महसूस करते हैं या किसी प्रियजन के साथ यह अनुभव साझा करते हैं। यह जानना ही उपचार की दिशा में पहला कदम है।
📌 अगले और आख़िरी एपिसोड में हम बात करेंगे कि ट्रॉमा हमारे रिश्तों और दूसरों से जुड़ाव की क्षमता को कैसे प्रभावित करता है।
डॉ. अभिमन्यु राठौड़ द्वारा प्रस्तुत पॉडकास्ट
सुनने के लिए धन्यवाद।
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आज आगस्ट 15 तारिक 2025 है, मेरा नाम डॉक्टर अभिमनी राथ हो रहे हैं और मैं Anti-Fragilient Operating System का फाउंडर हूँ. आज का Anti-Fragilient Transmission हमारी Trauma Symptom Series के बारे में बात करेगा जिसके बारे में मैंने कल पताया था तो ये sensory symptoms होते क्या है ये वो होता है कि देखे trauma के कारण आप किस तरीके सं वो भी बदल जाता है तो इस sensory symptoms simple term में क्या होता है ये वो चीज़ें होती हैं कि आप अपने senses देखना, सुनना,�िकता जो है, उसको कैसे experience करते हैं, और ये वो symptoms हैं, जो काफी जादा unsettling हो जाते हैं, no-transcript वो होना बंद हो जाता है आपको बता ही नहीं चलता है एक घंटा कहा निकल गया एक दिा होता है कि ऐसा लगता है जिसे आपको दिमाग जो है ना वो चेक आउट कर चुका है आपको प्रोटेक्ट करने के लिए तीसरा हो गया कि देख रहे हो जैसे किसी और के देख रहे हो चौता और आखरी हो गया कि दुनिया ही unreal लगती है ऐसे लगता है सपने की दुनिया है या जो sensory changes होते हैं यह बहुत ज़्यादा confusing करने वाले हो सकते हैं आपको असमंजस में डालने वाले हो सकते हैं और काफ़ी डरावने हो सकते हैं क्या, ये एक तरीका है कि आपका nervous system जो है, वो आपको ये बता रहा है, कि अभी रुको, मुझे ये जो हुआ था ना हमारे साथ हादसा ये जो sensory shifts हैं, जैसे मैंने बोला काफी unsettling हो सकते हैं, मगर ये बहुत बड़े clues भी होते हैं कि actually healing कहां पे चाहिए, हमारे अगले episode में, जो इस series का आखरी episode होगा, उसमें relational symptoms के बारे में बात करेंगे, कि कैसे trauma, इस चीज़ पे प्रभाव डालता है, कि किस तरीके से आप दूसरों से connection जोडते है