एंटिफ्रैजीलिएंट OS: डेली नॉवशिफ्ट ट्रांसमिशन्स

जब रिश्ते भी डराने लगें

Dr Abhimanyou Raathore Season 1 Episode 19

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कभी ऐसा लगा है कि सामने वाला इंसान सुरक्षित है…
 फिर भी दिल पीछे हट जाता है?

इस अंतिम एपिसोड में, डॉ. अभिमानी राठोर बताते हैं कि ट्रॉमा सिर्फ़ यादों में नहीं रहता — वह हमारे nervous system में पैटर्न बनाकर बैठ जाता है। यही पैटर्न आज के रिश्तों में दूरी, डर, ओवरथिंकिंग, क्लिंगीनेस, या अचानक गायब हो जाने जैसे व्यवहारों में बदल जाते हैं।

हम उन अदृश्य तरीकों को समझते हैं जिनसे ट्रॉमा रिश्ते कठिन बना देता है, जैसे—

• अपनी असली ज़रूरतें छुपाना
 • माइक्रो‑ट्रस्ट टेस्ट करना
 • घनिष्ठता से बचना
 • अच्छे लोगों के साथ भी असुरक्षित महसूस करना
 • चीज़ें बेहतर होते ही पीछे हट जाना
 • खुद ही रिश्ता बिगाड़ देना (self‑sabotage)

डॉ. राठोर बताते हैं कि ये सब “लोगों से बचना” नहीं है—
 ये ट्रिगर से बचना है।
ये दर्द के दोहराव से बचना है।
और यही समझ हीलिंग का पहला दरवाज़ा खोलती है।

अगर आज की बातचीत में आपको एक भी जगह खुद का प्रतिबिंब दिखा हो, तो जान लें—
 आप टूटी नहीं हैं, आप conditioned हैं।
 और conditioning बदली जा सकती है।

यह एपिसोड रिश्तों में सुरक्षा की भाषा सिखाता है—अपने शरीर को पढ़ने की, अपने डर को संभालने की, और सही लोगों के साथ धीरे‑धीरे खुलने की।

सुनिए, नोट कीजिए, और एक छोटा कदम चुनिए जो आप आज से दोहरा सकें।

क्योंकि सुरक्षा बड़े इशारों से नहीं,
 स्थिरता से खिलती है।

डॉ. अभिमन्यु राठौड़ द्वारा प्रस्तुत पॉडकास्ट
सुनने के लिए धन्यवाद।

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Speaker 1:

आज ओक्टोबर 21 तारिक है, 2025. मेरा नाम डॉक्टर अभिमानी राठोर है और मैं Anti-Fragilient Operating System का फाउंडर हूँ. आपका स्वागत है ट्रॉमा सीरीज में और इस final episode में हम focus करें में और हम किस तरीके से लोगों से connect करते हैं लोगों से नाता बनाते हैं उन लोथोड़ा समझते हैं काफी simple भाषा में देखो चक्कर यह है ड्रॉमा सिर्फ हमारे अंदर नहीं जीता वो इस चीगों को प्यार करते हैं, और लोगों के पर विश्वास करते हैं, क्या होता है कि हमारा जो nervous system है, वो patterns सीखता है, और patternsया होता है यही patterns होते हैं जो relationships को मुश्किल कर देते हैं, sustain करना, उनको बरकरार रखन के जाएगा और वो तब भी जब सामने वाले इंसान ने कोई ऐसा आपको कोई indication दिया नहीं है मगर उसक� जो हो ना, जो आप actually हो, आप वो नहीं दर्शाते, आप दिखाते नहीं हो लोगों को, और आप अपनी जो needs हैं, आपकी जो जरूरते हैं, वो गया आप कौन है तीसरा सिम्टम है क्लिंगीनेस और ओवर डिपेंडेंस मतलब कि सामने वाले से कॉंस्टेंटली या आश्�ढ़िया चल रहा है रिलेशन्चिप में, और कोई चिंता का कारण नहीं है, चोटा हो गया avoidance of intimacy, मैं लोग की घनिष्टा, closeness हैं ताकि कोई ज़्यादा close ना आ पाए। वो लोग भी जो जिनके बारे में आप care करते हो तेन विश्वास नहीं कर पाना। मतलब कि दूसरों का क्या उद्देश है, क्या मोटिव है, उसको पूरे टाइम जाचते रहना, सोचते रहना उसके बारे में और इस चीज़ की वे�ेशनशिप्स में भी शटा हो गया फीलिंग अनसेफ इच सेफ पीपल मतलब कि वो लोग जिन्होंने आपको प्यार दिखाया है हमेटम है साथवा हो गया close relationship को sabotage करना या जान के खराब कर देना मतलब कि अपने आपको दूर खीच लेना या खीचना खास तोर से जब चीज़ें बहुत अच्छी होने लग जाएं आपके घनिष्टा में, आपके relationship में देखो क्या होता है कि trauma जो है ना वो पीस एक काम एक एक शांती वाले कारण होने की बजाए मैं लगी जो चीज आपका घर होना चाहिए था वो आज वो आपको दुश्मन लगता है और हकीकत यह है कि हम हम लोगों को अवाइड नहीं कर रहे हैं हम ऐसी सिचुएशन में हम इन सिम्टम्स के द्वारा हम लोगों को अवाइड नही जर�ने एक या ज़्यादा से आपको connection महसूस हुआ हो एक या ज़्यादा से आपको connection महसूस हुआ हो तो एक चीज़ ध्यान रखना कि ये जो awareness है ये जो जागरुक्ता है जो इस से पैदा हुई है ठीक होने की और हील होने की और जिन्दगी को और अच्छी तरीके से जीने की और और ये रस्ता आपको अकेला नहीं चल रहा है। धन्यवाद मैं आपसे कल मिलूँगा और कल ये mini series तो नहीं होगी मगर कोई ऐसा ही interesting episode होगा सो जरूर सुनिएगा मुझे बताईएग